RBI on Banks : बैंक में डूबने का डर? जानें RBI की गारंटी वाले बैंक, जिनमें आपका पैसा हमेशा रहेगा सुरक्षित

RBI on Banks : देश में कई बैंक हैं, कुछ सरकारी और कुछ निजी। बहुत सारे बैंक कई बार किसी कारण से बंद हो जाते हैं, जिससे ग्राहकों का पैसा प्रभावित होता है। हाल ही में, आरबीआई गवर्नर ने इस समस्या का समाधान देते हुए बताया है कि बैंक कभी भी बंद नहीं हो सकते। आइए, हम इन बैंकों के बारे में और जानकारी प्राप्त करें।

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RBI on Banks : बैंक में डूबने का डर? जानें RBI की गारंटी वाले बैंक, जिनमें आपका पैसा हमेशा रहेगा सुरक्षित
RBI on Banks : बैंक में डूबने का डर? जानें RBI की गारंटी वाले बैंक, जिनमें आपका पैसा हमेशा रहेगा सुरक्षित

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दावा किया है कि देश में तीन ऐसे बैंक हैं, जो कभी भी डूबने का खतरा नहीं होता। इन बैंकों में जमा किया गया पैसा किले की तरह सुरक्षित रहता है। RBI का यह दावा देश के करोड़ों लोगों में एक भरोसा बढ़ाता है। इसके साथ ही यह सवाल उठता है कि ऐसी कौन-कौन सी विशेषताएं हैं जो इन बैंकों को इतना भरोसेमंद बनाए रखती हैं और अन्य बैंक इन मानकों को क्यों नहीं पूरा कर पाते हैं।

रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले हफ्ते देश के तीन बैंकों को डोमेस्टिक सिस्टेमिक इम्पोर्टेंट बैंक्स (Domestic Systemically Important Banks – D-SIBs) की श्रेणी में शामिल किया है। इसका अर्थ है कि एसबीआई (SBI), आईसीआईसीआई (ICICI), और एचडीएफसी बैंक (HDFC) देश की आर्थिक प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बैंकिंग संस्थान हैं। रोचक बात यह है कि इस सूची में एक सरकारी और दो प्राइवेट बैंकों का उल्लेख है।

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क्‍या है इनकी खासियत
बैंक कर्मचारी राष्ट्रीय संगठन के अध्यक्ष अश्विनी राणा बता रहे हैं कि इन बैंकों के पास एसेट बेस, यानी संपत्ति का आधार, इतना मजबूत है कि वे किसी भी आर्थिक बोझ को सह सकते हैं। देश के सबसे बड़े बैंकों में शामिल होने के साथ-साथ, इन बैंकों के पास लोन से ज्यादा एसेट्स हैं। यह ज्ञात है कि इनके डूबने का खतरा किसी भी परिस्थिति में नहीं है, क्योंकि लोन के डूबने के बावजूद इनके कामकाज पर कोई असर नहीं होगा। इन बैंकों का एनपीए भी तेजी से घट रहा है और ज्यादातर निवेश सुरक्षित विकल्पों में किए गए हैं। इस कारण इन तीनों बैंकों की बैलेंस शीट काफी मजबूत है।

जोखिम को करीब भी नहीं आने देते बैंक

बैंक बाजार डॉटकॉम के बैंकिंग एक्सपर्ट हेमंत एआर के अनुसार, SBI, HDFC, और ICICI जैसे बैंकों का फंसा हुआ कर्ज काफी कम है। सिर्फ़ एसबीआई की बात करें तो उसके बांटे कुल कर्ज में एनपीए का हिस्सा सिर्फ 0.67 फीसदी है। बैंकों ने अपनी कर्ज वसूली में काफी ग्रोथ हासिल की है। इनकी फाइनेंशियल कंडीशन भी काफी मजबूत है।

वित्तवर्ष 2022-23 के अनुसार, एसबीआई (State Bank of India) के पास कुल 55,16,979 करोड़ रुपये के असेट्स हैं, जबकि बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो 32,69,242 करोड़ रुपये है। बैंक में ग्राहकों के कुल 44,23,778 करोड़ रुपये जमा हैं। स्पष्ट है कि इस बैंक ने जितना लोन बांटा है, उससे करीब दो गुना संपत्ति बनाए रखी है। इन बैंकों के पास पूंजी की कमी नहीं है। बैंकों का जोखिम प्रबंधन काफी मजबूत है और लोन वसूलने की प्रक्रिया में भी तेजी आ रही है।

सुरक्षित निवेश से पैदा होता है भरोसा
हाल ही में, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड और दुनिया भर के अन्य बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में वृद्धि की है। आरबीआई ने भी लगातार 6 बार रेपो रेट बढ़ाकर इसे 6.25 फीसदी कर दिया है। इस परिस्थिति में, एसबीआई ने अपनी निवेश रणनीति में परिवर्तन किया है, ताकि वह ग्राहकों को अधिक रिटर्न प्रदान कर सके। बैंक अपनी पूंजी को सुरक्षित विकल्पों में ही निवेश करते हैं।

एसबीआई के निवेश पोर्टफोलियो की बात करें तो, 2022-23 में इसने 6.3 फीसदी से बढ़कर अब 15.87 लाख करोड़ रुपये में निवेश किया है। इसमें से 96 फीसदी निवेश घरेलू विकल्पों में किए गए हैं। एसबीआई का 62.94 फीसदी निवेश हेल्ड टू मेच्योरिटी (HTM) श्रेणी में होता है, जो ऐसे विकल्प हैं जिनमें जमा पैसों की मेच्योरिटी डेट होती है। इन विकल्पों से बैंक को 6.51 फीसदी रिटर्न प्राप्त होता है।

तकनीक से हो रहा विस्‍तार
हेमंत एआर का कहना है कि इन बैंकों ने तकनीकी विकास को तेजी से अपनाया है. वीडियो केवाईसी जैसी सुविधाओं ने बैंक की सेवाओं को रिमोट एरिया तक पहुंचाने में मदद की है. इन बैंकों ने अपने फंसे कर्ज की भी काफी हद तक वसूली कर ली है. इससे बैंकों का मुनाफा बढ़ने लगा है. सिर्फ एसबीआई (state bank of india news) को देखें तो बीते वित्‍तवर्ष में इस बैंक को 50,232 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ है.

पैसा डूबा तो क्‍या सरकार लेगी गारंटी
बैंक बाजार के विशेषज्ञ हेमंत एआर के अनुसार, इन बैंकों में जमा किए गए ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है और इनके डूबने का जोखिम न के बराबर है. जब भी इन बैंकों की वित्तीय स्थिति में कोई कमी होती है, तो सरकार रिजर्व बैंक के माध्यम से हस्तक्षेप करती है. सरकार ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा के लिए 5 लाख रुपये तक की जमा पर गारंटी भी देती है। DICGC योजना के तहत जमाकर्ताओं के पैसों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किया जाता है। इन बैंकों के डूबने की घटना से पहले ही सरकार ने आर्थिक सहायता प्रदान करके इन्हें उबारने का योजना बनाई भी है।

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