Property Rights: शादी के बाद बेटी को कितना मिलता है हिस्सा या बेटे की हो जाती है सारी प्रॉपर्टी

Property Rights: अकसर कई बार देखने को मिलता है संपत्ति के बंटवारे को लेकर कई लड़ाई झगड़े होते हैं लेकिन इसका समाधान निकालने के लिए सरकार द्वारा कानून भी बनाए गए हैं। कानून के माध्यम से प्रॉपर्टी का बंटवारा किया जाता है। लेकिन कुछ लोग सोचते हैं कि माता-पिता की संपत्ति पर शादी के बाद क्या बेटी का अधिकार भी होता है अथवा नहीं?

व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

लोग अकसर यही सोचते हैं कि पिता की जायदाद का मालिक उनका केवल बेटा ही होता है लेकिन भारत में बेटियों के लिए भी अधिकार बनाए गए हैं ताकि वे अपने अधिकारों से वंचित ना हो सके। तो आइए यहाँ जानते हैं कि शादी के बाद क्या बेटी को पिता की सम्पति प्राप्त करने अधिकार है या नहीं।

मुख्य बिंदु:

व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp
  • हिंदू सक्सेशन ऐक्ट, 1956 के अनुसार, बेटी को पिता की संपत्ति में समान अधिकार है, चाहे वह शादीशुदा हो या नहीं।
  • विवाह के बाद बेटी का पिता की संपत्ति पर अधिकार नहीं बदलता है।
  • बेटी अपने पिता की संपत्ति पर दावा कर सकती है, भले ही उसके पिता ने उसे अपनी मृत्यु से पहले संपत्ति हस्तांतरित नहीं की हो।
Property Rights: शादी के बाद बेटी को कितना मिलता है हिस्सा या बेटे की हो जाती है सारी प्रॉपर्टी
Property Rights: शादी के बाद बेटी को कितना मिलता है हिस्सा या बेटे की हो जाती है सारी प्रॉपर्टी

सम्पति अधिकार क्या होता है?

सम्पत्ति अधिकार किसी व्यक्ति के पास किसी वस्तु या संपत्ति पर होने वाले अधिकारों को संदर्भित करता है। इन अधिकारों में संपत्ति का उपयोग, उपभोग, और निपटान करने का अधिकार शामिल है। सम्पत्ति अधिकार कानून द्वारा संरक्षित होते हैं और इनका उल्लंघन अवैध है। सम्पत्ति अधिकार लोगों को अपने जीवन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। जब लोगों के पास अपनी संपत्ति पर अधिकार होते हैं, तो वे अपनी संपत्ति का उपयोग अपने घर, कार, या शिक्षा जैसी चीजों को खरीदने के लिए कर सकते हैं।

शादीशुदा बेटी का पिता की प्रॉपर्टी पर कितना हक़ होता है?

क्या शादीशुदा बेटी अपने पिता की सम्पति में अपना हक़ मांग सकती है? तो इसका उत्तर हाँ है, पिता की जितनी भी प्रॉपर्टी है उसके लिए बेटी अनुरोध कर सकती है। हिंदू सक्सेशन ऐक्ट, 1956 में वर्ष 2005 में हुए संसोधन के तहत बेटी को भी सम्पति का उत्तराधिकारी माना जाता है। अर्थात बेटी की शादी होने के पश्चात इस नियम में कोई भी बदलाव नहीं आएगा। बेटी बिना डरे अपनी अधिकार को मांग सकती है। पिता की संपत्ति पर बेटी का उतना ही हक है जितना कि बेटे का होता है।

यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं कि शादी के बाद बेटी के पिता की संपत्ति पर अधिकार कैसे लागू होते हैं:

  • यदि पिता की मृत्यु के बाद कोई भी उत्तराधिकारी नहीं है, तो बेटी पूरी संपत्ति का मालिक होगी।
  • यदि पिता की मृत्यु के बाद एक बेटा और एक बेटी है, तो वे दोनों संपत्ति में समान हिस्सा साझा करेंगे।
  • यदि बेटी और बेटा दोनों पिता की संपत्ति में अपना हिस्सा प्राप्त करने के लिए सहमत हैं, तो वे इसे स्वैच्छिक रूप से विभाजित कर सकते हैं।

बेटी कब नहीं कर सकती है दावा?

पैतृक संपत्ति पर बेटी का उतना ही अधिकार है जितना कि बेटे का। इसका मतलब है कि पिता की मृत्यु के बाद बेटी को पैतृक संपत्ति का आधा हिस्सा मिलेगा।

स्वअर्जित संपत्ति पर बेटी का अधिकार कमजोर होता है। इसका मतलब है कि पिता स्वअर्जित संपत्ति को अपनी मर्जी से किसी को भी दे सकता है। अगर पिता ने स्वअर्जित संपत्ति को बेटी को नहीं दिया है, तो बेटी को इसके लिए कानूनी कार्रवाई करनी होगी।

भारत का कानून क्या कहता है?

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 को हिंदू धर्म के लोगों की संपत्ति के उत्तराधिकार के संबंध में कानूनी प्रावधानों को निर्धारित करने के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम के तहत, बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार नहीं थे। 2005 में, इस अधिनियम में एक संशोधन किया गया, जिससे बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त हुए।

इस संशोधन के अनुसार, बेटी को पिता की संपत्ति में बेटे के समान अधिकार प्राप्त होते हैं। इसका मतलब है कि बेटी को पिता की संपत्ति में समान हिस्सेदारी मिलेगी, चाहे वह अविवाहित हो या विवाहित।

इस संशोधन का उद्देश्य बेटियों के अधिकारों को मजबूत करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। यह संशोधन हिंदू समाज में बेटियों के प्रति लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Leave a Comment