Mahashivratri 2024: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा कितनी बार करें: इस बार ज्योतिषीय संयोग का खास महत्व

महाशिवरात्रि, भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र त्योहार, भक्तों द्वारा बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि के दिन एक खास संयोग बन रहा है, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। आइए जानते हैं कि इस शुभ दिन पर शिवलिंग की पूजा कितनी बार करनी चाहिए और इस बार के विशेष संयोग के बारे में।

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Mahashivratri 2024: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा कितनी बार करें: इस बार ज्योतिषीय संयोग का खास महत्व
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शिवलिंग की पूजा की आवृत्ति

महाशिवरात्रि के दिन, शिवलिंग की पूजा की आवृत्ति को लेकर विशेष निर्देश हैं। ज्योतिषी और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन शिवलिंग की पूजा कम से कम एक बार तो करनी ही चाहिए, लेकिन जितनी अधिक बार पूजा की जा सके, उतना बेहतर होता है। पूजा की आवृत्ति आपकी श्रद्धा और समर्पण पर निर्भर करती है। विशेष रूप से, रात्रि जागरण के दौरान चार प्रहर में शिवलिंग की विशेष पूजा करने की परंपरा है।

इस वर्ष का विशेष संयोग

ज्योतिषियों के अनुसार, इस वर्ष महाशिवरात्रि पर एक खास संयोग बन रहा है। इस दिन ग्रहों की स्थिति ऐसी होगी जो भक्तों के लिए अत्यधिक शुभ मानी जा रही है। इस संयोग के दौरान शिवलिंग की पूजा करने से भक्तों को विशेष लाभ और आशीर्वाद प्राप्त होने की संभावना है।

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कब शुरू हो रहा है चतुर्दशी तिथि

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को, भगवान शिव के भक्त उनकी अराधना में व्रत रखते हैं। इस वर्ष, चतुर्दशी तिथि का आगाज़ 8 मार्च को रात 7:52 पर होगा और 9 मार्च को शाम 6:43 पर समाप्त होगा। चतुर्दशी तिथि के दौरान, खासकर रात्रि के चार प्रहर में, शिवलिंग की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

इस बार, उदय तिथि की गणना को न मानते हुए, महाशिवरात्रि का व्रत 8 मार्च को ही आरंभ होगा। इस दिन, भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की आराधना करेंगे, जिससे वे शिव की अनुकंपा और आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

पूजा विधि और महत्व

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की पूजा में जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पवित्र सामग्री का अर्पण किया जाता है। इस दिन व्रत रखना और रात्रि जागरण करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस संयोग का लाभ उठाने के लिए भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे विशेष पूजा और ध्यान के माध्यम से इस दिन को और अधिक शुभ बनाएं।

निष्कर्ष

महाशिवरात्रि भगवान शिव की अनन्य भक्ति का प्रतीक है। इस वर्ष के विशेष संयोग के साथ, भक्तों के पास अपनी श्रद्धा और भक्ति के माध्यम से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अद्वितीय अवसर है। इस शुभ दिन पर शिवलिंग की पूजा की आवृत्ति और विधि भक्तों को आत्मिक संतुष्टि और दिव्य आशीर्वाद प्रदान कर सकती है।

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