भारत में चेक बाउंस: चेक बाउंस के कानूनी परिणाम, देनदारी एवं बचाव के उपाय यहाँ जानिए

भारत में चेक बाउंस : जब बैंक में जमा किया गया कोई चेक पेमेंट के लिए रिजेक्ट हो जाता है, तो इसे चेक बाउंस होना जाना जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। चेक बाउंस होना दंडनीय अपराध है और इसके लिए कार्रवाई भी हो सकती है। इस मामले में, खाते में पर्याप्त धनराशि न होना एक मुख्य कारण हो सकता है।

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भारत में चेक बाउंस: चेक बाउंस के कानूनी परिणाम, देनदारी एवं बचाव के उपाय यहाँ जानिए
भारत में चेक बाउंस: चेक बाउंस के कानूनी परिणाम, देनदारी एवं बचाव के उपाय यहाँ जानिए

चेक पर सही साइन न होना भी इसे बाउंस कर सकता है। चेक देने वाले को ‘देनदार’ और चेक प्राप्त करने वाले को ‘लेनदार’ कहा जाता है। चेक बाउंस होने पर आपके खाते से धनराशि कटी जाएगी। इससे पहले कि आपको चेक देने वाले को सूचित किया जाए, आपको देनदार को इसकी सूचना देनी होगी। उस व्यक्ति को एक महीने के भीतर भुगतान करना होगा।

अगर वह एक महीने में नहीं भुगतान करता है, तो आप उसे नोटिस भेज सकते हैं। यदि 15 दिनों के भीतर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो आप उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं जैसे कि Negotiable Instrument Act 1881 के अनुच्छेद 138 के तहत केस दायर किया जा सकता है।

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चेक के बाउंस पर हो सकती है दो साल की सजा
जब चेक बाउंस होता है, तो यह एक दंडनीय अपराध माना जाता है और इसके खिलाफ धारा 138 के तहत केस दर्ज किया जाता है। ऐसे मामलों में, देनदार को जुर्माना या दो साल की कारावास की सजा हो सकती है, या फिर दोनों का प्रावधान हो सकता है। इसके अलावा, देनदार को ब्याज के साथ रकम भी चुकानी पड़ती है। केस आपके निवास स्थान के कोर्ट में दर्ज किया जाएगा।

तीन महीने में कैश करा लेना चाहिए चेक
जब चेक बाउंस होता है, तो बैंक आपको एक रसीद देता है, जिसमें चेक बाउंस होने की वजह बताई जाती है। यह ध्यान देने वाली बात है कि किसी भी चेक की वैधता तीन महीने तक होती है, उसके बाद उसकी समय सीमा समाप्त हो जाती है। इसलिए चेक को मिलने के 3 महीने के अंदर ही उसे कैश करा लेना चाहिए।

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