इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी को गुजारा-भत्ता देने के केस में पति का कर्तव्य बताया

High Court Maintenance Allowance to Wife: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 20 जुलाई, 2023 को एक फैसले में कहा कि पति की नौकरी से कोई आय नहीं होने पर भी वह अपनी पत्नी को भरण-पोषण प्रदान करने के लिए बाध्य है।

व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल की पीठ ने कहा कि पति एक स्वस्थ व्यक्ति है और शारीरिक रूप से पैसा कमाने में सक्षम है। यदि वह खुद को श्रम कार्य में लगाता है तो वह अकुशल श्रमिक के रूप में प्रति दिन लगभग 300-400 रुपये कमा सकता है।

allahabad-high-court-order-husband-duty

पति ने कोर्ट के फैसले को चुनौती दी

इस मामले में पति ने परिवार अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे अपनी अलग रह रही पत्नी को भरण-पोषण के रूप में 2,000 रुपये मासिक देने का आदेश दिया गया था। पति ने तर्क दिया था कि वह एक बेरोजगार व्यक्ति है और अपनी पत्नी को भरण-पोषण प्रदान करने में सक्षम नहीं है।

व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

पति ने अपनी मजबूरियाँ बताई

पति ने अपनी याचिका में इन सभी बातों का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी एक स्नातक है और शिक्षण पेशे से प्रति माह 10,000 रुपये कमा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं और डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं।

उन्होंने यह भी दलील दी कि वह मजदूरी करते हैं और किराए के कमरे में रहते हैं और उन्हें अपने माता-पिता और बहनों की देखभाल करनी है। अदालत ने इन सभी बातों पर विचार किया लेकिन फिर भी पति की याचिका को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस शख्स बोला- बेकार है आपका नोटिस, मैं नहीं आता

शादी के बाद से अलग है दोनों

दोनों की शादी 2015 में हुई थी। बाद में पत्नी ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई और वह 2016 से अपने माता-पिता के साथ रह रही है। उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा कि पति इस बात का कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका कि पत्नी शिक्षण पेशे से 10,000 रुपये कमा रही है।

कोर्ट का अंतिम फैसला जाने

अदालत ने कहा कि पत्नी शिक्षण पेशे से प्रति माह 10,000 रुपये कमा रही है। ऐसे में पत्नी अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता स्वस्थ व्यक्ति है और पैसा कमाने में सक्षम है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक अकुशल मजदूर के रूप में प्रति दिन लगभग 300-400 रुपये कमा सकता है। अदालत ने कहा कि पति की नौकरी से आय न होना एक तथ्य है लेकिन यह उसके कर्तव्यों को समाप्त नहीं करता है।

पति को अपनी पत्नी की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी तरह से काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

अन्य खबरें भी देखें:

Leave a Comment