Debit Card Insurance: दुर्घटना में मृत्यु पर मिलेगा लाखों का लाभ, जानें कैसे उठाएं इसका लाभ

डेबिट कार्ड एक ऐसा कार्ड है जिसका उपयोग आप अपने बैंक खाते से पैसे निकालने या खरीदारी करने के लिए कर सकते हैं। डेबिट कार्ड के साथ, आपको कुछ बीमा कवर भी मिलते हैं। यह बीमा आपके कार्ड के उपयोग के कारण होने वाली कुछ वित्तीय हानि को कवर करता है। आइए जानते हैं पूरी जानकारी को कि Debit Card से हम अपना इंश्योरेंस कवर कैसे कराएं?

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Debit Card Insurance: दुर्घटना में मृत्यु पर मिलेगा लाखों का लाभ, जानें कैसे उठाएं इसका लाभ

ये प्रमुख बैंक देते हैं यह सुविधा 

भारत के प्रमुख बैंक अपने डेबिट कार्ड के साथ एक्सीडेंटल इंश्योरेंस भी प्रदान करते हैं।

इनमें शामिल हैं:

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  • कोटक महिंद्रा बैंक
  • एचडीएफसी बैंक
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
  • आईसीआईसीआई बैंक
  • डेवलपमेंट बैंक ऑफ सिंगापुर

ये सभी बैंक डेबिट कार्ड के साथ इंश्योरेंस कवर भी ऑफर प्रदान करते हैं। लेकिन इन बैंकों की अपनी अपनी शर्तें होती है जिन्हें आपको पूरा करना होता है। इसके पश्चात आप इंश्योरेंस का लाभ ले सकते हैं। यदि आपके साथ कोई घटना होती है और आपकी मृत्यु हो जाती है तो इसका लाभ आपके परिवार के सदस्यों को दिया जाता है।

एक्सीडेंटल इंश्योरेंस क्लेम: New Details

एक्सीडेंटल इंश्योरेंस एक महत्वपूर्ण सुविधा है, जो दुर्घटना के कारण होने वाली मृत्यु या विकलांगता के मामले में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। डेबिट कार्ड के साथ मिलने वाला एक्सीडेंटल इंश्योरेंस भी एक ऐसी सुविधा है, जो कई बैंकों द्वारा प्रदान की जाती है।

लेनदेन भी है जरूरी

डेबिट कार्ड के साथ मिलने वाले एक्सीडेंटल इंश्योरेंस का लाभ उठाने के लिए, आपको अपने बैंक के नियमों और शर्तों के अनुसार लेनदेन करना होगा। कई बैंकों में 6 महीने के अंदर 25,000 रुपये का लेनदेन करने की शर्त होती है तथा कई बैंकों में 1 साल के अंदर 50,000 रुपये का लेनदेन करने की शर्त होती है।

इसलिए, अपने बैंक से संपर्क करें और यह जान लें कि आपके लिए पैसों का ट्रांजेक्शन करना बहुत आवश्यक है।

नॉमिनी कैसे कर सकता है क्लेम?

डेबिट कार्ड के साथ मिलने वाला एक्सीडेंटल इंश्योरेंस एक ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी है, जो आपके बैंक द्वारा प्रदान की जाती है। इसमें आपको अलग से पॉलिसी नंबर प्रदान नहीं किया जाता है। अतः, क्लेम करने के लिए पहले आपको अपने बैंक से कांटेक्ट कर लेना है। इसके बाद बैंक आपको क्लेम करने के लिए कुछ जरुरी डाक्यूमेंट्स दस्तावेज प्रदान करता है। इन दस्तावेजों को पूरा करके आपको बैंक में ले जाकर सबमिट करना होता है।

क्या इन शर्तों को पूरा करके मिलेगा क्लेम?

क्लेम करने के लिए नॉमिनी को डेबिट कार्डधारक का कानूनी उत्तराधिकारी होना चाहिए। यदि डेबिट कार्डधारक की मृत्यु के समय कोई नॉमिनी नहीं है, तो क्लेम करने के लिए उत्तराधिकारी सर्टिफिकेट जमा करना होगा। क्लेम करने की समय सीमा 60 दिन है। 60 दिनों के बाद किए गए क्लेम को स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालाँकि ऐसा नहीं है की प्रत्येक बैंक के एक जैसे नियम है इसमें अलग-अलग बैंकों की अपनी शर्तें होती है।

इस प्रकार से करें क्लेम 

देश के कई बैंक अपने डेबिट कार्ड के साथ एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कवर भी देते हैं। यह एक तरह से उपहार है, लेकिन ज्यादातर लोग जानकारी के अभाव में इसका फायदा नहीं उठा पाते हैं। अगर आप थोड़ी सी जानकारी और कागज तैयार रखें तो डेबिट कार्ड के साथ आने वाले इस बीमा का लाभ आसानी से उठा सकते हैं। तो आइए समझ लेते हैं कि कैसे डेबिट कार्ड के साथ आने वाले इस बीमा का लाभ उठाया जा सकता है।

  • क्लेम करने के लिए कौन पात्र है: एक्सीडेंटल इंश्योरेंस क्लेम करने के लिए नॉमिनी को मृत डेबिट कार्डधारक का कानूनी उत्तराधिकारी होना चाहिए।
  • क्लेम करने के लिए क्या करना होगा:
    • दुर्घटना की स्थिति में तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
    • मृत्यु प्रमाणपत्र और पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त करें।
    • नॉमिनी को इंश्योरेंस क्लेम फॉर्म भरने के लिए दें।
    • क्लेम फॉर्म के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न करें:
      • मृत्यु प्रमाणपत्र
      • पोस्टमार्टम रिपोर्ट
      • एफआईआर या पंचनामा (एक्सीडेंट की स्थिति में)
      • स्पॉट पंचनामा, एक्सीडेंट स्पॉट और गाड़ी की फोटो
      • अखबारों की कटिंग
      • इलाज के दौरान मौत होने पर अस्पताल से मिले पेपर
      • सैलरी स्लिप या बिजनेस का प्रकार
      • ड्राइविंग लाइसेंस
      • नॉमिनी न होने पर उत्तराधिकारी सर्टिफिकेट
    • क्लेम फॉर्म और दस्तावेज बैंक में जमा करें या ईमेल करें।
  • क्लेम करने की समय सीमा: क्लेम 60 दिनों के अंदर होना चाहिए।

इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत 

नॉमिनी का पता और कॉन्टेक्ट डिटेल्स, इंश्योरेंस क्लेम फॉर्म, ओरिजिनल डेथ सर्टिफिकेट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआईआर या पंचनामा (एक्सीडेंट की स्थिति में), स्पॉट पंचनामा, एक्सीडेंट स्पॉट और गाड़ी की फोटो, अखबारों की कटिंग, इलाज के दौरान मौत होने पर अस्पताल से मिले पेपर, सैलरी स्लिप या बिजनेस का प्रकार, ड्राइविंग लाइसेंस, नॉमिनी न होने पर उत्तराधिकारी सर्टिफिकेट।

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