भारत में 4 किताबें जिन पर है प्रतिबंध, पढ़ने पर हो सकती है जेल, जानिए क्यों लगा है बैन

किताबें पढ़ना, ज्ञान प्राप्त करने का एक उत्कृष्ट माध्यम है, लेकिन कभी-कभी कुछ किताबें इतनी विवादास्पद होती हैं कि उन्हें बैन कर दिया जाता है। भारत में भी ऐसी कई पुस्तकें हैं जिन्हें विभिन्न कारणों से बैन किया गया है। ये किताबें न सिर्फ चर्चा का विषय बनीं, बल्कि कुछ मामलों में विवाद का कारण भी बनीं।

व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp
भारत में 4 किताबें जिन पर है प्रतिबंध, पढ़ने पर हो सकती है जेल, जानिए क्यों लगा है बैन
भारत में 4 किताबें जिन पर है प्रतिबंध, पढ़ने पर हो सकती है जेल, जानिए क्यों लगा है बैन

बैन की गई प्रमुख किताबें

1. ‘द हिंदूजः एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री’ – वेंडी डोंनिगर: इस पुस्तक को विवादों के चलते पेंगुइन इंडिया ने बैन कर दिया था। धार्मिक संगठनों ने इस किताब के कंटेंट को हिंदू धर्म की गलत व्याख्या करने के लिए विरोध किया था। शिक्षा बचाओ आंदोलन संस्था के अध्यक्ष दीनानाथ बत्रा ने इस किताब को बैन करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया था।

2. ‘द सतैनिक वर्सेस’ – सलमान रश्दी: इस किताब को इस्लाम धर्म का अपमान करने के आरोप में भारत में बैन किया गया है। यह किताब विश्व भर में चर्चा में रही है, और इसने ब्रिटेन में काफी सराहना भी प्राप्त की थी। इसे बुकर प्राइज के लिए नॉमिनेट भी किया गया था, जिससे इसकी लोकप्रियता का पता चलता है।

व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें WhatsApp

3. ‘लेडी चैटर्लीज लवर’ – डी एच लॉरेंस: यह किताब ब्रिटिश शासन काल में भारत में बैन की गई थी। इसमें एक विवाहित महिला की कहानी है, जिसका उसके पति के पैरालिसिस के बाद दूसरे पुरुष के साथ अफेयर होता है। यह किताब अपने बोल्ड कंटेंट के कारण उस समय के समाज में काफी विवादास्पद थी।

4. ‘द फेस ऑफ मदर इंडिया’ – कैथरीन मेयो: अमेरिकी इतिहासकार कैथरीन मेयो की इस किताब को भारत में इसके आपत्तिजनक कंटेंट के कारण बैन किया गया है। इसमें लेखिका ने भारतीय संस्कृति और पुरुषों को नकारात्मक रूप में चित्रित किया है, जिससे भारतीय समाज में काफी विरोध हुआ था।

किताबों पर बैन का प्रभाव

इन किताबों पर बैन लगने से पाठकों के बीच न सिर्फ जिज्ञासा बढ़ी, बल्कि साहित्यिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर भी बहस हुई। यह विवाद उन पाठकों के लिए एक नया दृष्टिकोण लेकर आया, जो खुले विचारों और साहित्य की स्वतंत्रता को महत्व देते हैं। इन बैन की गई किताबों ने न सिर्फ भारतीय साहित्यिक जगत में चर्चा का माहौल बनाया, बल्कि पूरे विश्व में इस विषय पर चर्चा को प्रेरित किया।

Leave a Comment