10 साल बाद भी इंतजार में, कब आएगा 8th Pay Commission? जानिए सरकार का प्लान

2014 में सरकार ने कर्मचारियों के लिए 7वां वेतन आयोग को लागू किया था, जिससे कर्मचारियों को बड़ा फायदा हुआ था। DA की वृद्धि से सैलरी में भी काफी इजाफा हुआ था। अब, इसके लागू होने में 10 साल बीत गए हैं। जानिए 8वां वेतन आयोग को कब लागू किया जाएगा और सरकार की इसके संबंध में क्या योजना है।

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10 साल बाद भी इंतजार में, कब आएगा 8th Pay Commission? जानिए सरकार का प्लान
10 साल बाद भी इंतजार में, कब आएगा 8th Pay Commission? जानिए सरकार का प्लान

देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का इंतजार है. कर्मचारियों का कहना है कि नया वेतन आयोग (8th Pay Commission new update) आएगा तो वह महंगाई की मौजूदा दर और अन्य चुनौतियों का आकलन कर सरकार से सैलरी बढ़ाने की सिफारिश करेगा. कर्मचारी यूनियन की डिमांड है कि सरकार को चुनाव से पहले नया वेतन आयोग बना देना चाहिए. बता दें कि पिछले वेतन आयोग (7th Pay Commission) को बने 10 साल पूरे हो गए हैं. अभी केंद्रीय कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के तहत सैलरी मिल रही है. इसका गठन 2014 में हुआ था. इसके बाद 2016 में इसे लागू किया गया. इससे केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी हुई थी. इससे पहला वेतन आयोग 1946 में बना था और उसके बाद कुल 7 वेतन आयोग आ चुके हैं. अमूमन हर 10 साल पर नया वेतन आयोग बनता है और अपनी रिपोर्ट सरकार को देता है.

क्यों जरूरी होता है वेतन आयोग

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वेतन आयोग (8th Pay Commission pay matrix) बनाया जाता है तो वह मौजूदा पे स्केल, भत्तों, और कर्मचारियों को मिल रहे अन्य लाभों का आकलन करता है। इसमें महंगाई की मौजूदा दर, आर्थिक हालात, कॉस्ट ऑफ लिविंग, और बाजार में जरूरी चीजों के दाम को ध्यान में रखा जाता है और उसी के आधार पर सैलरी में वृद्धि की सिफारिश होती है। आयोग इस बात को ध्यान में रखता है कि सिफारिशें ऐसी की जाएं जिससे हर स्तर के कर्मचारी का उत्तरदाता फायदा पा सके, और किसी के हित की अनदेखी न हो।

सरकारी खजाने पर बोझ

वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ता है. क्योंकि कर्मचारियों की तादाद को देखते हुए सैलरी और भत्तों को बढ़ाना पड़ता है. यही नहीं सरकारी कर्मचारियों को नया वेतनमान मिलने का फायदा प्राइवेट नौकरीपेशा को भी मिलता है. राज्य सरकार के कर्मचारियों की सैलरी भी सेंटर के वेतनमान को देखकर बढ़ती है. राज्य सरकारें और प्राइवेट कंपनियां केंद्रीय वेतनमान की सिफारिशों का आधार बनाकर अपने कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी करती हैं.

चुनाव से पहले क्या आ सकता है नया वेतन आयोग

लोकसभा चुनाव इस वर्ष होने वाले हैं और नए वेतन आयोग की गठाएँ करने की अवधि भी समाप्त हो गई है। हालांकि सरकार इसके लिए अभी तैयार नहीं है। हाल ही में वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने यह बताया कि भारत सरकार के द्वारा 8वें वेतन आयोग की गठा करने के लिए अभी कोई योजना नहीं बनाई गई है।

विधानसभा चुनाव में उठी थी मांग

नवंबर 2023 में हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले, राजनीतिक दलों ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नए वेतन आयोग की स्थापना की मांग को समर्थन देने का एलान किया था। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया में केंद्रीय कर्मचारियों और रक्षा कर्मियों का समर्थन प्राप्त करने के लिए किया था।

कब बना था 7वां वेतन आयोग

7वां वेतन आयोग (7th Pay Commission) कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल में आया था. इसका गठन राज्य और लोकसभा के चुनाव के पहले हुआ था. हालांकि बीजेपी (BJP govt) ने दूसरी व्यवस्था बनाई. उसने नई पेंशन योजना में बदलाव पर फोकस किया, जो राज्य और केंद्र के कर्मचारियों के लिए है. इसके तहत कर्मचारी NPS में अपनी बेसिक सैलरी का 10 फीसदी योगदान कर रहे हैं जबकि केंद्र सरकार ने अपना योगदान बढ़ाकर 10 से 14 फीसद कर दिया है.

एनपीएस रीव्यू के पीछे खास मकसद

वित्त सचिव सोमनाथन द्वारा नेतृत्व किए जा रहे एक समिति ने एनपीएस की समीक्षा की है। इस समिति ने केंद्र सरकार को योगदान बढ़ाने के लिए एक सुझाव दिया है, जिसकी प्रस्तावना राजनीतिक दलों के साथ हुई थी। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त होने पर कर्मचारी को सुनिश्चित करना है कि उसे 40 से 45 प्रतिशत की पेंशन के रूप में उसकी अंतिम सैलरी मिले। लोकसभा चुनाव से पहले, राजनीतिक दल सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि एक नए वेतन आयोग की स्थापना की जाए।

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