रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या है? CRR | SLR | पूरी जानकारी

क्या आपने कभी सोचा है की रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट (Repo Rate and Reverse Repo Rate) क्या होता है या कोई भी बैंक लोन या सेविंग पर ब्याज दरें कैसे निर्धारित करता है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें की Central Bank of India (भारतीय रिजर्व बैंक) एक विशिष्ट दर पर कमर्शियल बेंको को उधर देता है जिसके आधार पर बैंक द्वारा उपभोक्ता ब्याज दर को तय किया जाता है।

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लगभग हर कुछ महीनो में मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) मौद्रिक नीतियों (Monetary Policies) की घोषणा करती है। RBI के द्वारा कोरोना महामारी के कारण दो वर्षों से रेपो दर को नहीं बदला गया लेकिन फरवरी 2023 से 25 बेसिस प्वाइंट से रेपो दर को बढ़कर 6.25% से 6.50% कर दिया है।

CRR | SLR | पूरी जानकारी

रिवर्स रेपो दर 3.35 % है। US Federal Reserve बेंचमार्क ब्याज दर में इस वर्ष 0.75% की वृद्धि हुई है जो की 1994 के बाद से सबसे अधिक वृद्धि है, इस कारण से वैश्विक बाजारों पर भी अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। इसी के परिणामस्वरूप RBI ने अपने repo rate में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है जिससे की अधिकांश बैंक होम लोन की ब्याज दरों को बढ़ाएंगे और होम लोन मंहगा हो जाएगा।

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इसलिए आज हम आपको बताएंगे की रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट (Repo Rate and Reverse Repo Rate) क्या होता है ? रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट जुडी हुई सभी जानकारियों को आज हम अपने आर्टिकल के माध्यम से आपको समझने की कोशिश करेंगे।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या है? CRR | SLR | पूरी जानकारी
रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या है?

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की परिभाषा

मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) द्विमासिक बैठक रेपो रेट (Repo Rate) और रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) का फैसला किया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर के द्वारा मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अध्यक्षता की जाती है। वर्तमान में शक्तिकांत दास जी (भारतीय रिजर्व बैंक) RBI का नेतृत्व कर रहे हैं। आइए विस्तार में समझते हैं की Repo Rate और Reverse Repo Rate (रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट) क्या होता है।

रेपो रेट (Repo Rate)

पुनर्खरीद विकल्प (Repurchasing Option) या पुनर्खरीद समझौते (Repurchasing Agreement) से रेपो रेट (Repo Rate) शब्द बना हुआ है। अगर आपने बैंक से लोन लिया होगा तो आपको पता होगा की बैंक से ली जाने वाली राशि पर बैंक के द्वारा ब्याज लिया जाता है। इसी तरह से जब कोई बैंक RBI से लोन लेती है तो RBI इस कर्जे पर बैंक से ब्याज को वसूलता है यही ब्याज रेपो रेट कहलाती है।

अगर रेपो रेट (Repo Rate) कम होगा तो ग्राहक को दिए जाने वाला लोन पर ब्याज दर कम होता है और अगर रेपो रेट ज्यादा हुआ तो ग्राहक को दिए जाने वाले लोन पर ब्याज दर ज्यादा होता है। रेपो रेट का ज्यादा और कम होना बाजार पर निर्भर करता है।

रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate)

जब कोई भी बैंक अपनी जमा पूंजी को किसी स्किम या FD के तहत RBI में जमा करता है तथा बैंक को इस जमा राशि पर भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा एक निश्चित दर पर ब्याज प्रदान किया जाता है इस निश्चित दर को ही रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) कहते हैं। बैंक भी कभी कभी अधिक ब्याज कमाने के लिए अपमी अधिक से अधिक जमापूंजी को RBI के पास जमा रखती है। इसका नियंत्रण बाजार में नकदी लिक्विडिटी के तहत किया जाता है। रिवर्स रेपो रेट और मुद्रा आपूर्ति के बीच indirect संबंध है अगर Reverse Repo Rate घटती है तो धन की आपूर्ति बढ़ जाती है।

इसे भी देखें >>> क्रेडिट और डेबिट का मतलब क्या होता है?|

इस तरह से आप रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट की परिभाषा को समझ सकते हैं। रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के साथ साथ आपको CRR और SLR के बारे में भी पता होना चाहिए इसलिए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के बाद हमारे द्वारा इनकी परिभाषाएँ भी दी गयी हैं।

CRR (Cash Reserve Ratio) का मतलब

CRR का फुल फॉर्म Cash Reserve Ratio है, देश के सभी बैंकों को अपनी जमा धनराशि में से कुछ निश्चित राशि को आरबीआई के पास जमा रखनी होती है ताकि अगर कभी भी देश पर कोई भी संकट आ जाए तो उस आर्थिक संकट से निपटने के लिए आरबीआई के पास बैकअप होना चाहिए। जब भी कोई बैंक दिवालिया घोषित होता है तो उस बैंक के ग्राहकों को दी जाने वाली राशि भी CRR से दी जाती है।

SLR (Statutory Liquidity Ratio) का मतलब

SLR (Statutory Liquidity Ratio) के तहत RBI नकदी लिक्विडिटी कंट्रोल के लिए SLR का उपयोग करता है। वह फंड जो बैंक किसी लोन देने से पहले ही कुछ फंड को अपने पास रखता है उसे बैंको का SLR कहते हैं। इसमें गोल्ड रिजर्व, नकदी, सरकारी प्रतिभूति बांड्स इत्यादि चीजें होते हैं। SLR के तहत RBI के पास कॉमर्शियल बेंको को एक निश्चित रकम जमा करनी पड़ती है।

भारत में अब तक के रेपो रेट

भारत में रेपो दर (Repo Rate) पिछले कुछ वर्षों से इस प्रकार रही है

रेपो दर अवधि
(Repo rate term)
रेपो रेट
(Repo rate)
28 जनवरी 20148.00%
15 जनवरी 20158.00%
04 मार्च 20158.00%
02 जून 20157.00%
29 सितंबर 20157.00%
05 अप्रैल 20167.00%
04 अक्टूबर 20166.00%
02 अगस्त 20176.00%
06 जून 20186.00%
01 अगस्त 20187.00%
07 फरवरी 20196.00%
04 अप्रैल 20196.00%
06 जून 20196.00%
07 अगस्त 20195.00%
06 फरवरी 20205.00%
27 मार्च 20204.00%
22 मई 20204.00%
06 अगस्त 20204.00%
09 अक्टूबर 20204.00%
मई 20224.40%
08 जून 20224.90%
05 अगस्त 20225.40%
30 सितंबर 20225.90%
7 दिसंबर 20226.25%
8 फरवरी 20236.50%
Repo rate so far in India (रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट)

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट से संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

भारत में वर्तमान में रेपो दर क्या है ?

वर्तमान में, भारत में रेपो दर 6.50% है। यह दर जून 2023 में निर्धारित की गई थी, जब मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने इसे 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 6.50% कर दिया था​

भारत में वर्तमान में रिवर्स रेपो रेट क्या है ?

भारत में वर्तमान में RBI ने रिवर्स रेपो रेट की वैल्यू 5.90% से घटाकर अब 3.35% कर दी है।

वर्तमान में CRR कितना है ?

RBI ने बाज़ार की (Inflation) की स्थिति को देखते हुए CRR की वैल्यू 4.5% शुद्ध मांग के अनुरूप कर दी है।

SBI की होम लोन ब्याज दर कितनी है ?

वर्तमान समय में SBI होम लोन ब्याज दर 8.40% प्रति वर्ष है और इस लोन की अवधि लगभग 30 साल है।

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